फड़ पढ़ लम किताब आदिया तू नाम रखा लिया काज़ी हद से चल फड़ के तलवार तू नाम रखा लिया गाज़ी मक्का मदीना घूम के तू नाम रखा लिया हाजी बुल्ले शाह असल की तुझे अब कौन रखेगा राज़ी
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